उत्तर प्रदेश के बरेली में एक कॉलेज के प्रोफेसर को दिल्ली में आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में बड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। कॉलेज प्रशासन ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान कॉलेज प्रशासन ने प्रोफेसर से स्पष्टीकरण मांगा और मामले से जुड़े तथ्यों की समीक्षा की। जांच पूरी होने के बाद प्रशासन ने निष्कर्ष निकाला कि उनका आचरण संस्थान के सेवा नियमों और अनुशासन के अनुरूप नहीं था। इसी आधार पर उन्हें सेवा से हटाने का फैसला लिया गया।
इस कार्रवाई के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोगों का मानना है कि शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों को सेवा नियमों का पालन करना चाहिए, जबकि कुछ लोग इस फैसले को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि संस्थान में अनुशासन बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी कर्मचारियों को निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है। वहीं संबंधित प्रोफेसर के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और उनके अगले कदम पर सभी की नजर बनी हुई है।
