अखिल भारतीय श्रमिक पार्टी का आवेदन बिना सुनवाई के खारिज, EC को कानूनी नोटिस, धारा 29A पर सुनवाई की मांग, हाई कोर्ट जाने को भी तैयारअखिल भारतीय श्रमिक पार्टी का आवेदन बिना सुनवाई के खारिज, EC को कानूनी नोटिस, धारा 29A पर सुनवाई की मांग, हाई कोर्ट जाने को भी तैयार

धारा 29A(7) के उल्लंघन का आरोप; दिल्ली हाईकोर्ट के हरि राजमणिक्कम फैसले का दिया हवाला

नई दिल्ली/ठाणे: प्रस्तावित राजनीतिक दल “अखिल भारतीय श्रमिक पार्टी” ने अपने पंजीकरण आवेदन को बंद अथवा अस्वीकृत किए जाने की प्रक्रिया को लेकर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को अधिवक्ता के माध्यम से एक ‘लीगल नोटिस-कम-फाइनल रिप्रेजेंटेशन’ प्रेषित किया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अधिकृत प्रतिनिधि रवि गोपाल निगम की ओर से भेजे गए इस औपचारिक नोटिस में आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A(7) के अंतर्गत उचित, युक्तिसंगत और प्रभावी अवसर न दिए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया गया है।

नोटिस में उल्लेख किया गया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा पूर्व में कुछ दस्तावेजों और शपथपत्रों (एफिडेविट्स) में कमियां दर्शाए जाने के बाद पार्टी ने 12 सितंबर 2025 को ही अपना विस्तृत जवाब दाखिल कर दिया था। इसके साथ ही पार्टी ने सभी आवश्यक संशोधित प्रपत्र जमा कराने की इच्छा जताते हुए संबंधित कमियों का स्पष्ट विवरण (पार्टिकुलर्स) मांगा था। पार्टी का आरोप है कि 10 अप्रैल 2026 को आयोग की ओर से भेजा गया आधिकारिक पत्र कथित रूप से गलत नाम व पते पर प्रेषित किया गया, जिससे वह समय पर नहीं मिल सका। इसके बाद 13 अप्रैल 2026 को अधिकृत प्रतिनिधि ने नई दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग मुख्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया था, लेकिन बाद में 15 अप्रैल 2026 को बिना पर्याप्त पूर्व सूचना के कथित टेलीफोनिक सुनवाई कर औपचारिकता निभाई गई।

विधिक नोटिस में दिल्ली उच्च न्यायालय के चर्चित निर्णय ‘हरि राजमणिक्कम बनाम भारत निर्वाचन आयोग’ [W.P.(C) No. 1361/2026] का हवाला देते हुए विधिक स्थिति स्पष्ट की गई है। पार्टी का कहना है कि उच्च न्यायालय ने उक्त फैसले में स्पष्ट व्यवस्था दी थी कि यदि आयोग सत्यापन के दौरान किसी विसंगति या सामग्री पर निर्भर करता है, तो आवेदक दल को उसका स्पष्टीकरण देने के लिए संबंधित विशिष्ट सामग्री और विवरण उपलब्ध कराना अनिवार्य है। श्रमिक पार्टी ने मांग की है कि आयोग अपने स्तर पर कमियों से संबंधित सभी दस्तावेज और विवरण साझा करे ताकि उन्हें दूर किया जा सके।

पार्टी ने अपने कानूनी नोटिस में मुख्य रूप से पंजीकरण आवेदन को खारिज करने के फैसले पर पुनर्विचार करने, आवेदन व संशोधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां (सर्टिफाइड कॉपीज) जारी करने और धारा 29A(7) के तहत प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप व्यक्तिगत सुनवाई का सार्थक अवसर देने का आग्रह किया है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यदि आयोग निर्धारित समयावधि में न्यायसंगत कार्रवाई करते हुए पंजीकरण प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाता है, तो पार्टी संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करने सहित अन्य सभी विधिक व संवैधानिक विकल्पों को अपनाने के लिए बाध्य होगी।

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