शास्त्रीनगर के बाद अब कैंट क्षेत्र में सीलिंग की आहट: प्रतिष्ठित गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल को परिसर खाली करने का नोटिसशास्त्रीनगर के बाद अब कैंट क्षेत्र में सीलिंग की आहट: प्रतिष्ठित गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल को परिसर खाली करने का नोटिस

मेरठ: शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट में आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ हुई हालिया सीलिंग की बड़ी कार्रवाई की आंच अब छावनी (कैंट) क्षेत्र तक पहुंच गई है। रक्षा संपदा अधिकारी (DEO) विनीत कुमार ने सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और आदेशों का हवाला देते हुए छावनी क्षेत्र में अवैध कब्जे और अनाधिकृत निर्माण करने वालों को कड़ा अल्टीमेटम दिया है।

इसी कड़ी में वेस्ट एंड रोड स्थित प्रतिष्ठित गुरु तेग बहादुर (GTB) पब्लिक स्कूल को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर परिसर खाली करने और सामान हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई से कैंट क्षेत्र के अन्य स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है, जबकि स्कूल में पढ़ रहे करीब दो हजार छात्र-छात्राओं के अभिभावकों में बच्चों के भविष्य को लेकर भारी बेचैनी है।

बंगला संख्या 227 का कानूनी विवाद: दशकों पुरानी है लड़ाई

यह मामला बंगला संख्या 227, जीएलआर सर्वे नंबर 375 स्थित रक्षा भूमि का है, जिस पर प्रशासन के अनुसार अवैध और अनाधिकृत रूप से स्कूल का संचालन किया जा रहा है। रक्षा संपदा कार्यालय ने इस मामले से जुड़े कानूनी इतिहास को भी स्पष्ट किया है:

  • 17 दिसंबर 1994: इस मामले में रक्षा विभाग की ओर से सबसे पहला वैधानिक नोटिस जारी किया गया था।
  • 18 जुलाई 1995: जिला न्यायालय ने स्कूल प्रबंधन की मिसलेनियस अपील (संख्या 284/1994) को निरस्त कर दिया था।
  • 26 मई 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय (High Court) ने भी ‘गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल बनाम स्टेट ऑफिसर्स एवं अन्य’ याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया था।
  • 23 अप्रैल: कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद अब इस मामले में पुनः वैधानिक बेदखली की कार्रवाई शुरू की गई है।

रक्षा संपदा अधिकारी विनीत कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सार्वजनिक या रक्षा भूमि पर अवैध कब्जे व अनाधिकृत निर्माण को किसी भी सूरत में संरक्षण नहीं दिया जा सकता। रक्षा भूमि एक राष्ट्रीय संपत्ति है, जिसकी सुरक्षा सर्वोपरि है।

एक सप्ताह की मोहलत, बलपूर्वक कार्रवाई की चेतावनी

नोटिस में स्कूल प्रबंधन को एक सप्ताह के भीतर स्वेच्छा से परिसर खाली करने के आदेश दिए गए हैं। चेतावनी दी गई है कि यदि इस अवधि में सहयोग नहीं किया गया, तो प्रशासन सख्त प्रशासनिक और विधिक कदम उठाते हुए बलपूर्वक परिसर को खाली कराएगा।

दूसरी ओर, सत्र के बीच में आई इस विपत्ति से अभिभावक परेशान हैं कि अचानक दो हजार बच्चों का दाखिला दूसरी जगह कैसे होगा। स्कूल के प्रधानाचार्य गोपाल दीक्षित का कहना है कि पहले भी नोटिस मिले हैं और इस संबंध में प्रबंधन द्वारा बातचीत की जा रही है।

फ्लैशबैक: शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में क्या हुआ था?

सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के अनुपालन में बीते 8 अप्रैल को आवास एवं विकास परिषद और जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के 44 चिन्हित आवासीय भवनों में चल रहे छह नामचीन स्कूलों और पांच अस्पतालों को पूरी तरह सील कर दिया था। इसके तुरंत बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अशोक कटारिया ने इन अस्पतालों के लाइसेंस भी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए थे।

शास्त्रीनगर में सील किए जा चुके मुख्य संस्थान:

  • स्कूल: एमपीजीएस, हैप्पी आवर्स, अमेरिकन किड्स, गुरुकुलम, लिटिल फ्लावर और डीआरएस किड्स स्कूल।
  • अस्पताल व डायग्नोस्टिक सेंटर: डॉ. तिवारी अल्ट्रासाउंड सेंटर, डॉ. अशोक गर्ग नर्सिंग होम, जनप्रिय नर्सिंग होम, सुधा हॉस्पिटल, वर्धमान हॉस्पिटल और सनफोर्ड हॉस्पिटल।

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