हिन्दी, अंग्रेजी और गृहविज्ञान में स्नातक अभ्यर्थी का सामाजिक विज्ञान के टीचर पद पर नियुक्ति समेत अन्य अनियमितता के आरोप में बुलंदशहर के जिला विद्यालय निरीक्षण शिव कुमार ओझा को निलम्बित कर दिया गया है। उन पर संतकबीर नगर में वर्ष 2018 में डीआईओएस रहते हुए अल्पसंख्यक संस्था में सहायक अध्यापकों की अनियमित नियुक्तियों में लिप्त होने के आरोप है। इन नियुक्तियों के कारण ही माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव व निदेशक को उच्च न्यायालय में व्यक्तिगत उपस्थिति होने की स्थिति उत्पन्न हुई। माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने डीआईओएस के निलंबन काआदेश जारी कर दिया है। 

संतकबीर नगर के पचपेड़वा स्थित आदर्श जनता इंटर कॉलेज में तीन सहायक अध्यापकों की 2018 में नियुक्ति की गई थी। प्रबंधतंत्र ने इसका विज्ञापन ग्राम्य वार्ता और अंग्रेजी में सृष्टि मेल में करवाया, ये दोनों ही अखबार राज्य स्तर के नहीं थे। जबकि नियमानुसार राज्यस्तरीय अखबार में विज्ञापन निकलवाया जाना था।

इसके साथ ही विज्ञापन में रिक्त पद के स्थायी या अस्थायी होने का उल्लेख नहीं था और न ही विज्ञापन में न्यूनतम आर्हता, वेतनमान, आयु सीमा आदि का उल्लेख था। इसके साथ ही जीव विज्ञान व गणित में केवल 6-6 आवेदन ही प्राप्त हुए जबकि न्यूनतम सात आवेदन पत्र होने पर ही प्रक्रिया शुरू की जा सकती थी। 

इस तरह चयन की कार्रवाई विधिसंगत नहीं थी। सामाजिक विज्ञान में शिखा पाण्डेय का चयन किया गया, जिनकी शैक्षिक आर्हता विषय के लिए पात्र नहीं थी। इनकी स्नातक डिग्री हिन्दी, अंग्रेजी व गृहविज्ञान थी। इस पद के लिए स्नातक में इतिहास, राजनीति शास्त्र, भूगोल, या अर्थशास्त्र में से दो विषय होना चाहिए। यह चयन भी अनियमित पाया गया। 

उच्च न्यायालय में अभ्यर्थियों द्वारा दायर रिट याचिका में शिव कुमार ओझा ने 22 अक्तूबर, 2018 को जो प्रतिशपथ पत्र दाखिल किया उसमें भी अनियमितता का उल्लेख नहीं था। इसके कारण माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव व निदेशक को उच्च न्यायालय में व्यक्तिगत उपस्थिति होने की स्थिति उत्पन्न हुई। 

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