उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐप आधारित कैब और डिलीवरी सेवाओं के लिए नए नियम लागू किए हैं। नई व्यवस्था के दायरे में Ola, Uber जैसी कैब सेवाओं के साथ सामान, पार्सल और कूरियर डिलीवरी से जुड़ी कंपनियां भी आएंगी। सरकार का उद्देश्य इन सेवाओं को अधिक व्यवस्थित करना, यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और कंपनियों की जवाबदेही तय करना है।
नए नियमों के तहत राज्य में काम करने वाली एग्रीगेटर कंपनियों के लिए लाइसेंस लेना जरूरी होगा। मौजूदा कंपनियों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा, जबकि नई कंपनियों को सेवा शुरू करने से पहले मंजूरी लेनी होगी। लाइसेंस की वैधता पांच साल होगी और इसके लिए निर्धारित शुल्क भी देना होगा।
ड्राइवरों की सुरक्षा और सत्यापन पर भी विशेष जोर दिया गया है। ड्राइवरों के लिए पहचान सत्यापन, पुलिस वेरिफिकेशन, मेडिकल जांच और वाहन की फिटनेस जैसी शर्तें लागू की गई हैं। इसके अलावा कंपनियों को ड्राइवरों के लिए स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है।
यात्रियों की सुरक्षा के लिए वाहनों में ट्रैकिंग सिस्टम और पैनिक बटन जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया गया है। किराए और राइड कैंसिलेशन से जुड़े नियमों को भी नियंत्रित किया जाएगा, ताकि यात्रियों से मनमाना शुल्क न लिया जा सके और किराए की व्यवस्था अधिक पारदर्शी रहे।
डिलीवरी और लॉजिस्टिक सेवाओं को भी नए नियमों के तहत लाया गया है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से ऐप आधारित परिवहन और डिलीवरी सेवाओं की निगरानी बेहतर होगी तथा यात्रियों और डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके लिए परिवहन विभाग ने लाइसेंस आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

