उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लगभग 10 वर्षों तक बिजली कनेक्शन चलता रहा। जांच में पता चला कि जिस एनओसी के आधार पर कनेक्शन जारी किया गया था, वह नकली थी और उस पर किए गए अधिकारी के हस्ताक्षर भी फर्जी पाए गए हैं।

मामले का खुलासा विभागीय जांच के दौरान हुआ। दस्तावेजों की पड़ताल में कई अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद अधिकारियों ने पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि रिकॉर्ड में हेरफेर कर लंबे समय तक कनेक्शन जारी रखा गया।

घटना सामने आने के बाद बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है कि आखिर इतने लंबे समय तक फर्जी दस्तावेजों के बावजूद मामला पकड़ में क्यों नहीं आया। विभाग ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने विभाग की कार्यप्रणाली और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल फर्जी एनओसी तैयार करने वालों की पहचान करने और उनसे जुड़े नेटवर्क की जांच की जा रही है। विभाग का दावा है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त बनाया जाएगा।

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