सीबीएसई के तीन-भाषा नियम पर भड़के के. अन्नामलाई, शिक्षा मंत्रालय से आदेश वापस लेने की मांगसीबीएसई के तीन-भाषा नियम पर भड़के के. अन्नामलाई, शिक्षा मंत्रालय से आदेश वापस लेने की मांग

चेन्नई: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9 के छात्रों के लिए अचानक लागू किए गए नए तीन-भाषा नियम को लेकर विवाद गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता के. अन्नामलाई ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से इसमें तुरंत हस्तक्षेप करने और इस आदेश को वापस लेने की अपील की है। अन्नामलाई का मानना है कि इस नीति को इतनी जल्दी लागू करने से छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव बढ़ेगा और पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित होगी। सीबीएसई द्वारा हाल ही में जारी किए गए नए नोटिफिकेशन के तहत आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से ही कक्षा 9 के सभी छात्रों के लिए तीसरी भाषा पढ़ना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। बोर्ड ने शर्त रखी है कि इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। सबसे बड़ा विवाद इस बात पर है कि इस नियम को लागू करने के लिए पहले 2029-30 का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन बोर्ड ने इसे समय-सीमा से काफी पहले ही लागू करने का फरमान सुना दिया।

भाजपा नेता के. अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपनी चिंताएं साझा करते हुए इस फैसले को पूरी तरह अव्यावहारिक बताया। उन्होंने तर्क दिया कि तमिलनाडु जैसे राज्यों के छात्रों के लिए यह निर्णय बेहद चौंकाने वाला है, क्योंकि इन छात्रों ने पहले ही कक्षा 6 में अपनी पसंद की भाषा का चयन कर लिया था और वे उसी के अनुसार पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतनी कम समय-सीमा के भीतर हाईस्कूल (कक्षा 9) के छात्रों पर अचानक एक नई भाषा थोप देना उनके सीखने की स्वाभाविक क्षमता को बाधित करेगा और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालेगा।

अन्नामलाई ने सीबीएसई की पुरानी घोषणाओं की याद दिलाते हुए बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अप्रैल 2026 में जब सीबीएसई ने कक्षा 6 के लिए तीन-भाषा नीति की घोषणा की थी, तब उन्होंने बच्चों के भाषाई विकास को देखते हुए इसका पुरजोर स्वागत किया था। उस समय बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर यह भरोसा दिलाया था कि कक्षा 9 के छात्रों के लिए यह नियम चरणबद्ध तरीके से साल 2029-30 से लागू किया जाएगा। अब अचानक इस आदेश को समय से पहले लागू करना बोर्ड के अपने ही पुराने आश्वासन के खिलाफ है। अन्नामलाई ने शिक्षा मंत्रालय से अपील करते हुए कहा कि शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बहुभाषी, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार करना होना चाहिए, न कि उन पर अकादमिक बोझ डालना। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को इस मामले का संज्ञान लेते हुए सीबीएसई के इस नए नोटिफिकेशन को तुरंत वापस लेना चाहिए और पहले से निर्धारित साल 2029-30 की समय-सीमा का ही कड़ाई से पालन करना चाहिए।

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