होली पर विशेष लेख ––

प्रेम के रंग में ही सारे भेद समाप्त हो जाते है होली का त्यौहार प्रेम और सद्भावना का त्योहार है। होली का त्यौहार भारतवर्ष का प्राचीनतम त्यौहार है सदियों से होली का यह त्यौहार मनाया जा रहा है आपसी प्रेम और सौहार्द का त्यौहार होली भारत में रहने वाले सभी नागरिकों को आपस में जोड़ने वाली सद्भावना का प्रतीक है होली एक ऐसा त्यौहार है जिस त्यौहार में लोग एक दूसरे से गले मिलते हैं गले मिलने पर एक दूसरे के दिल मिलते हैं आपस में अगर कुछ थोड़ी बहुत खटास भी है तो वह भी गले मिलते ही समाप्त हो जाती है होली का त्यौहार एक दूसरे को आपस में जोड़ता है होली का त्यौहार एक जोड़ने वाला त्यौहार दो विचारों को आपस में मिलाने वाला त्यौहार आपसी मनभेद के जो विचार हैं वह प्रेम में समाहित हो जाते हैं और प्रेम के रंग में ही सारे भेद समाप्त हो जाते है होली का त्यौहार प्रेम और सद्भावना का त्योहार है होली में तरह-तरह के रंग देखने को मिलते हैं वैसे भी तरह-तरह के रंग में दिखाई पड़ता है लेकिन होली के त्यौहार में आदमी का जो अपना रंग है बदल जाता है और प्रेम के रंग में सभी नजर आते हैं काले रंग का आदमी चेहरे पर जब हरा और गुलाबी रंग लग जाता है तो उसका अपना स्वरूप गायब हो जाता है और गोरे रंग पर काला रंग लगा दिया जाए तो उसका अपना स्वरूप गायब हो जाता है रंगभेद भी मिट जाता है देखा जाए तो हर तरह से कई तरह के भेद मिटाने वाला त्यौहार होली है होली को हिंदू धर्म में कुछ मुख्य त्योहारों में सबसे पावन त्यौहार माना गया है प्राचीनतम कथाओं में के अनुसार होली का त्यौहार लोगों द्वारा मनाने की प्रथा चली आ रही है भक्त प्रहलाद और हिरण्यकश्यप और हिरण्यकश्यप की बहन होलिका की कथा के अनुसार जब भक्त प्रहलाद को हिरण्य कश्यप के आदेशानुसार उसकी बहन होलिका ने अपनी गोद में लेकर जलती हुई अग्नि पर बैठ गए तो भक्त पहलाद भगवान की लीला से बच गया और वही कुत्सित मानसिकता की शिकार होलिका जलकर राख हो गई जबकि होलिका को वरदान था कि अग्नि उसे जला नहीं सकती लेकिन बद नियति और बुरे विचार रखने के कारण होलिका को भी जलना पड़ा उसी के बाद से प्रतिवर्ष रंग भरी होली के 1 दिन पूर्व होलिका दहन कार्यक्रम भी भारत में मनाया जाता है जिसमें लकड़ी की अग्नि तैयार की जाती है और प्रहलाद को भी प्रतीक के रूप में रखा जाता है तथा होलिका को तथा होलिका को जलता हुआ दिखाया जाता है मंत्रों के साथ विधिवत होलिका दहन कार्यक्रम संपन्न होता है यह परंपरा भी कई वर्षों से चली आ रही है विभिन्न स्थानों पर होलिका दहन कार्यक्रम का आयोजन भारतीय परंपरा के अनुसार होता चला रहा है भारतीय परंपरा के अनुसार होलिका दहन कार्यक्रम के बाद सुबह होते ही आसपास के ग्रामीण होलिका दहन के स्थान पर पहुंचकर स्थान की परिक्रमा की करते हैं और जलती हुई अग्नि को नमन करते हैं प्रणाम करते हैं यह परंपरा सदियों से चली आ रही है रंग भरी होली का गीत भी अपने आप में एक अलग महत्व रखता है लोग हाथों में अबीर गुलाल और कई तरह के रंग लिए अपने घर से निकलते हैं और अपने मित्रों नगर वासियों ग्राम वासियों से मिलकर एक दूसरे को प्रेम और सौहार्द पूर्वक रंग लगाते हैं अबीर लगाते हैं और गुलाल उड़ाते हैं झूमते नाचते हुए होली का दिन, रंग भरी होली का दिन व्यतीत होता है होली के दिन रंग और अबीर गुलाल खेलने के बाद स्नानादि से निवृत्त होकर नए नए कपड़े पहनने की प्रथा की चली आ रही है भारतवासी नए नए कपड़े पहन कर एक दूसरे से मिलने के लिए घरों में जाकर गले मिलकर होली की बधाई देते हैं तथा एक दूसरे को गुजिया और मिठाई भी खिलाते हैं देखा जाए तो होली का त्यौहार सद्भावना और प्रेम का त्यौहार प्रतीक है होली के त्यौहार में मौसम भी एक अलग चटकीला नजर आता है फाल्गुनी बयार चलती है तो लोगों के मन में एक नया एहसास होता है इसी फाल्गुन के मांस महीने में आम में खूब बौर आते हैं तथा चारों ओर मौसम सुहावना और मनमोहक होता है जाड़े की समाप्त इस मौसम के साथ होती है तब बताया जाता है कि होलिका दहन के बाद से ही लोग अपने अपने गर्म वस्त्र अंदर रख देते हैं और इसी दिन से गर्मी की शुरुआत हो जाती है होली का त्यौहार तो अपने आप में एक विशेष स्थान रखता ही है इसके साथ ही होली के दिन का मंत्रों आदि के रूप में भी अपना विशेष महत्व है जिसमें बहुत से लोग पूजा आदि के द्वारा अपने इष्ट को प्रश्न करने का प्रयोजन करते हैं होली के इस त्यौहार में सभी को एक दूसरे से इस तरह मिलना चाहिए कि जो आपसी मनमुटाव है या कुछ भी खटास हो वह तनिक शेष ना रहे आपसी प्रेम और भाईचारा निरंतर बढ़ता रहे राष्ट्रीय भावना का जागरण हो एकता और अखंडता की ओर आने वाली पीढ़ी अग्रसर हो प्राचीन भारत में जिस तरह से आपस में सामंजस्य सद्भावना एकता अखंडता व्याप्त रही है उसी तरह से भारत की जो संस्कृति है वह संस्कृति दिनों दिन पुष्ट होती रहे संस्कृति में जो आधुनिक परिवर्तन हो रहे हैं उनके साथ साथ प्राचीनतम भारतीय संस्कृत के जो विशेष स्वाभाविक गुण रहे हैं उनका होना भी बहुत ही आवश्यक है जो भारतीय समाज के लिए विशेष लाभप्रद है और अग्रिम पीढ़ी के लिए भी ज्यादा आवश्यक है भारत में होली दीपावली तरह-तरह के त्यौहार भी शायद इसी लिए बनाए गए जो हमारी भारतीय परंपरा है भारतीय संस्कृति है भारतीय सौहार्द है यह बना रहे आचार विचार बड़ों के साथ व्यवहार आपसी मेल मिलाप एक दूसरे के बीच की दूरियों को मिटाने का प्रयास मन में आई खटास इन सब को दूर करने और आपसी प्रेम और सामंजस्य बनाए रखने के लिए ही भारतीय त्योहार मनाए जा रहे हैं और इनका चलन लगातार जारी है भारतीय संस्कृत को बचाने के लिए इन त्योहारों का विशेष योगदान है। मैंने कविता के माध्यम से कहा की , प्रीति की रीति सिखाती है होली, बीच की दूरी घटाती है होली ,प्रेम के रंग में रंग जाय तन मन , हुड़दंग में रंग दिखाती है होली।

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