उत्तर प्रदेश सरकार ने ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर जारी 4 जून के शासनादेश को वापस लेने का फैसला किया है। इस आदेश का प्रदेशभर के अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा था। लंबे समय से चल रहे प्रदर्शन और हड़ताल के बाद सरकार ने इस आदेश को निरस्त कर दिया, जिससे संबंधित वर्गों ने राहत की सांस ली है।
नई ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने के बाद अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों का कहना था कि इससे पारंपरिक रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी और हजारों लोगों के रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका यह भी कहना था कि नई व्यवस्था में कई तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं हैं, जिनका समाधान किए बिना इसे लागू करना उचित नहीं होगा। इसी मांग को लेकर प्रदेश के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन किए गए और रजिस्ट्री कार्यालयों में कामकाज भी प्रभावित हुआ।
विरोध को देखते हुए सरकार ने पूरे मामले की समीक्षा की और सभी पक्षों से मिले सुझावों पर विचार करने के बाद 4 जून के आदेश को वापस लेने का निर्णय लिया। इसके साथ ही फिलहाल पहले से लागू व्यवस्था के अनुसार ही रजिस्ट्री का कार्य जारी रहेगा। सरकार का कहना है कि यदि भविष्य में किसी नई व्यवस्था को लागू किया जाएगा तो उससे पहले संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा की जाएगी और सभी व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।
इस फैसले के बाद अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं ने सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकार ने उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना है। वहीं अब सभी की नजर इस बात पर है कि भविष्य में रजिस्ट्री व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं और सरकार इस दिशा में आगे क्या कदम उठाती है।
