नई दिल्ली: एक साल से खाली पड़े भारत में अमेरिकी राजदूत के पद को आखिरकार नया चेहरा मिल गया है। पूर्व राजदूत एरिक गार्सेटी के बाद अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले सर्जिओ गोर दिल्ली पहुंच चुके हैं और अगले हफ्ते औपचारिक रूप से अपना कार्यभार संभालेंगे। गोर ऐसे समय में यह अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब भारत और अमेरिका के संबंध शायद अपने सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप के अप्रत्याशित बयानों और अधर में लटकी ट्रेड डील की वजह से दोनों देशों के रिश्तों में असहजता देखी जा रही है। सर्जिओ गोर का यह दूसरा भारत दौरा है। इससे पहले वह अक्टूबर में भी भारत आए थे, जब उनकी नियुक्ति को सीनेट से मंजूरी नहीं मिली थी। उस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप पीएम मोदी को एक निजी और महान मित्र की तरह मानते हैं। गोर ने दोनों देशों की मजबूत नेतृत्व क्षमता का जिक्र करते हुए संबंधों को लेकर आशावादी रुख दिखाया था। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने पीएम मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप के साथ एक तस्वीर भी भेंट की थी।

व्हाइट हाउस में जब गोर को अमेरिकी राजदूत पद की शपथ दिलाई गई थी, तब राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि वह सर्जिओ गोर को अमेरिका की सबसे अहम द्विपक्षीय साझेदारी की जिम्मेदारी सौंप रहे हैं। ट्रंप ने यह भी कहा था कि अमेरिका के प्रधानमंत्री मोदी के साथ पहले से ही शानदार रिश्ते हैं और गोर ने इन संबंधों को और मजबूत किया है। ऐसे में भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में गोर की भूमिका दोनों देशों के रिश्तों की दिशा और दशा तय करने में बेहद अहम मानी जा रही है, खासकर उस वक्त में जब अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों से भारतीय कूटनीति को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

सर्जिओ गोर को भारत के राजदूत के साथ-साथ दक्षिण और मध्य एशिया का विशेष दूत भी बनाया गया है। इस क्षेत्र में भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश शामिल हैं। फिलहाल इनमें से कुछ देशों में अमेरिका का कोई स्थायी राजनयिक प्रतिनिधि नहीं है और वहां चार्ज डी अफेयर्स ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। गोर को व्हाइट हाउस का प्रभावशाली इंसाइडर भी माना जाता है और वह ट्रंप के बेहद करीबी माने जाते हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप खुद कह चुके हैं कि उन्होंने कम समय में करीब 4,000 लोगों को सरकारी विभागों में नियुक्त कर “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडे को आगे बढ़ाया है। ऐसे में माना जा रहा है कि सर्जिओ गोर एक ऐसे राजनयिक साबित हो सकते हैं, जिनके जरिए भारत पारंपरिक डिप्लोमैटिक चैनल से हटकर सीधे ट्रंप तक अपनी बात पहुंचा सके।

गौरतलब है कि गोर की नियुक्ति राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले साल अगस्त में की थी और उन्हें दक्षिण-मध्य एशिया की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी, जो इस पद के लिए एक नई भूमिका मानी जा रही है। उस समय ट्रंप ने सर्जिओ को अपना करीबी दोस्त बताते हुए कहा था कि वह उन पर पूरी तरह भरोसा करते हैं और वह कई सालों से उनके साथ काम कर रहे हैं।

सर्जिओ गोर से पहले एरिक गार्सेटी भारत में अमेरिका के राजदूत थे। जनवरी में उनके स्वदेश लौटने के बाद से यह पद खाली पड़ा था। अब गोर की तैनाती के साथ उम्मीद की जा रही है कि भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊर्जा और दिशा देखने को मिल सकती है।

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