नई दिल्ली : केंद्र सरकार की तरफ से आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने के फैसले का विपक्ष ने एक सुर में स्वागत किया है। मोदी सरकार की तारीफ करने वालों में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से लेकर कांग्रेस के सांसद तक शामिल हैं। विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार का यह फैसला जनगणना में जातिगत गणना, डेटा-आधारित सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। विपक्ष का मानना है कि यह फैसला पिछले कई वर्षों से चल रही राजनीतिक बहस का नतीजा है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने आगामी राष्ट्रीय जनसंख्या जनगणना के साथ-साथ जाति आधारित जनगणना कराने के केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है। इसके साथ ही स्टालिन ने मुख्यमंत्रियों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक उच्च स्तरीय सलाहकार परिषद के गठन का आग्रह किया है।

सीएम स्टालिन ने कहा कि केंद्र के इस फैसले से साक्ष्य-आधारित सामाजिक न्याय और नीति निर्माण के प्रति तमिलनाडु की प्रतिबद्धता की पुष्टि होती है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि विभिन्न राज्यों में मौजूद गहरी सामाजिक गतिशीलता और जाति संरचनाओं को देखते हुए जाति जनगणना एक बेहद संवेदनशील प्रक्रिया है। यदि इसे सावधानी से नहीं संभाला गया, तो इससे अनपेक्षित सामाजिक तनाव पैदा हो सकता है।

कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का फैसला डेटा-आधारित सामाजिक न्याय की दिशा में एक अहम कदम है, जिसकी मांग विपक्ष के नेता राहुल गांधी लंबे समय से करते आ रहे थे।

मणिक्कम टैगोर ने कहा कि राज्य की नीतियों पर इसके दूरगामी प्रभावों को देखते हुए केंद्र सरकार को फ्र्‍ेमवर्क को अंतिम रूप देने से पहले सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सलाह लेनी चाहिए, ताकि किसी भी तरह की गलतियों और कमियों से बचा जा सके।

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