नई दिल्ली: फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय ने तीन डॉक्टरों को बिना किसी पुलिस सत्यापन के नौकरी पर रखा था। इनमें से दो डॉक्टरों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरा डॉक्टर दिल्ली के लाल किला धमाके का आत्मघाती हमलावर निकला। यह खुलासा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में हुआ है।

शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ा लगभग 260 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया गया है। इसमें विश्वविद्यालय के प्रवर्तक के खिलाफ जांच के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षकों के बयान शामिल किए गए हैं। इस मामले में अल फलाह समूह के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी (61) और विश्वविद्यालय की सभी शैक्षणिक संस्थाओं को नियंत्रित करने वाला अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत आरोपी बनाया गया है।

ईडी ने आरोप लगाया है कि सिद्दीकी और उनके ट्रस्ट ने छात्रों से वसूली गई फीस के जरिए अवैध धन जुटाया और अपने संस्थानों की मान्यता व प्रमाणन को लेकर कथित रूप से गलत जानकारी दी। एजेंसी ने अदालत से दोनों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है।

ईडी ने अपने बयान में कहा कि उसने फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित विश्वविद्यालय की जमीन और इमारत को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है, जिसकी कीमत करीब 140 करोड़ रुपये आंकी गई है। फिलहाल अदालत ने इस आरोपपत्र पर संज्ञान नहीं लिया है।

अधिकारियों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज के कई डॉक्टर सिर्फ कागजों पर ही नियुक्त दिखाए गए थे। उन्हें ‘22 दिन पंच’ या ‘सप्ताह में दो दिन’ काम करने की शर्त पर नियमित शिक्षक बताया गया, ताकि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) से जरूरी मंजूरी हासिल की जा सके और अस्पताल बिना किसी बाधा के चलता रहे।

ईडी ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार का भी बयान दर्ज किया है। उन्होंने जांच एजेंसियों के परिसर दौरे और विश्वविद्यालय अस्पताल से जुड़े डॉ. मुज़म्मिल और डॉ. शाहीन की गिरफ्तारी की पुष्टि की। रजिस्ट्रार ने बताया कि 2019 में स्थापित मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की नियुक्ति बिना किसी पुलिस सत्यापन के की गई थी।

विश्वविद्यालय की कुलपति और प्राचार्य ने ईडी को दिए बयान में कहा कि जिन डॉक्टरों पर आतंक से जुड़े मामलों में शामिल होने के आरोप हैं, वे सभी उनके कार्यकाल के दौरान ही नियुक्त हुए थे। इनमें अक्टूबर 2021 से जनरल मेडिसिन विभाग में जूनियर रेजिडेंट डॉ. मुज़म्मिल गनई, अक्टूबर 2021 से फार्माकोलॉजी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहीन सईद और मई 2024 से जनरल मेडिसिन में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नियुक्त डॉ. उमर नबी शामिल हैं। बाद में डॉ. उमर नबी को लाल किला धमाके का आत्मघाती हमलावर बताया गया।

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